वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐसा हो आपका घर, तभी चमकेगी किस्मत

लखनऊ. घर के मुख्य द्वार की स्थिति का सीधा संबंध उस घर में रहने वाले लोगों की सामाजिक, मानसिक और आर्थिक स्थिति से होता है। अगर घर का मुख्य द्वार वास्तु दोषों से मुक्त है, तो घर में सुख-समृद्धि, रिद्धी-सिद्धि रहती है, सभी प्रकार के मंगल कार्यों में वृद्धि होती है और परिवार के लोगों में आपसी समंजस्य बना रहता है। वास्तु शास्त्र के मुताबिक, सुख-शांति के लिए घर का मुख्य द्वार वास्तु दोष से मुक्त होना बेहद ही जरूरी है। यदि इसमें कोई दोष हो, तो इसे तुरंत वास्तु उपायों के द्वारा ठीक कर लेना चाहिए।

 

कहां हो घर का मुख्य द्वार
किसी भी भवन में कहां पर दरवाजा रखना शुभ होगा और कहां रखना अशुभ होगा? कितने दरवाजे रख सकते हैं? वास्तुशास्त्र के अनुसार घर के किसी भी दिशा के मध्य में दरवाजा शुभ नहीं होता है। लेकिन मंदिर, होटल, कार्यालय, सार्वजनिक स्थल पर मुख्य द्वार शुभ होता है। भवन के किस भाग में मुख्यद्वार रखने का क्या शुभ अशुभ परिणाम होता है इसके लिये भवन की प्रत्येक दिशा को समान नौ भागों में विभाजित किया गया है। इस विभाजन से कुल बत्तीस भाग बनते हैं। हर भाग का एक देवता प्रतिनिधित्व करता है। प्रत्येक भाग पर द्वार होने पर निम्नलिखित शुभाशुभ परिणाम मिलेंगे।

beautiful home

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साफ-सुथरा हो मुख्य द्वार
मुख्य द्वार के सामने कोई पेड़, दीवार, खंभा, कीचड़, हैंडपम्प या मंदिर की छाया नहीं होनी चाहिए। घर के मुख्य द्वार की चौड़ाई उसकी ऊंचाई से आधी होनी चाहिए। मुख्य दरवाजा छोटा और पीछे का दरवाजा बड़ा होना आर्थिक परेशानी का सबब है।

 

दिशा का भी रखें ध्यान
घर का मुख्य द्वार घर के बीचो-बीच न होकर दाएं या बाएं ओर स्थित होना चाहिए। यह परिवार में कलह आर्थिक परेशानी और रोग का ध्योतक है। उदाहरण के लिए, पूर्व में स्थित द्वार पूर्व में मध्य में न होकर उत्तर पूर्व की ओर या दक्षिण पूर्व की ओर होना चाहिए।

 

मुख्य दरवाजे पर न लगाएं बेल
मुख्य द्वार खोलते ही सामने सीढ़ी नहीं होनी चाहिए। दरवाजा हमेशा अंदर की ओर खुलना चाहिए और दरवाजा खोलते और बंद करते समय किसी प्रकार की चरमराहट की आवाज नहीं होनी चाहिए। घर के तीन द्वार एक सीध में नहीं होने चाहिए। मुख्य द्वार घर के अन्य सभी दरवाजों से बड़ा होना चाहिए। घर के मुख्य द्वार पर बेल आदि नहीं लगानी चाहिए और इसके सामने कोई वृक्ष भी नहीं होना चाहिए। इससे द्वार वेध होता है।

 

Vashtu Shastra

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वास्तु दोष निवारण हेतु उपयोगी सुझाव
मुख्य द्वार में वस्तु दोष होने पर घर के द्वार पर घंटियों की झालर लगाएं, जिससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नहीं होगा। मुख्य द्वार पर क्रिस्टल बॉल लटकाएं। मुख्य द्वार पर लाल रंग का फीता बांधें। द्वार के बाहरी ओर दीवार पर पाकुआ दर्पण स्थापित करें। यदि घर का द्वार खोलते ही सामने सीढ़ी हो, तो सीढ़ी पर पर्दा लगा दें।

 

तुलसी के सामने शाम को जलाएं दीपक
घर में तुलसी के पौधा लगाएं और संध्या काल में नित्य उसके सामने घी के दीपक जलाएं, तो समस्त वास्तु दोषों का नाश होता है। घर के आसपास हरी दूब उगाई गई हो, तो प्रतिदिन गणेश जी की प्रतिमा पर थोड़ी हरी दूब चढ़ाने से वास्तु दोष दूर होता है। सुख शांति के लिए घर के उत्तरी भाग में धातु से बने कछुए की प्रतिमा रखें, इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह कम होता है।

 

भोजन करते समय गृह स्वामी के सामने क्लेश न करें
घर में भोजन करते हुआ गृह स्वामी के सामने क्लेश न करें और कोई नकारात्मक बात भी न करें। इससे परेशानियां कम होती है।

 

साफ करें मकड़ी का जाला
घर में मकड़ी का जाल हो तो तुरंत साफ करें, अन्यथा राहू के दुष्प्रभाव में वृद्धि होती है।

 

बीम के नीचे न सोएं
बीम के नीचे सोने या बैठने से मानसिक तनाव और क्लेश होता है, इससे बचने के लिए बीम के दोनों सिरों पर लकड़ी की बांसुरी लटका दें।

 

तुरंत दूर कराएं सीलन
घर में हो रही सीलन को तुरंत ठीक करवा लें। यह घर की आर्थिक स्थिति पर असर डालती है। इसे ठीक करवाने से आर्थिक समृद्धि मिलेगी।

 

सभी वास्तुदोष दूर करने लिए करें ये उपाय
घर में प्रत्येक प्रकार के वास्तु दोष को दूर करने के लिए घर के ऊपर एक मिट्टी के बर्तन में सतनाजा भर कर और दूसरे मिट्टी के बर्तन में पानी भरकर पक्षियों के लिए रखें।

 

वास्तु के अनुसार घर की सजावट करते समय ध्यान रखें
– यदि वास्तु को ध्यान में रखकर घर का निर्माण किया जाए तो वास्तुदोषों के दुष्परिणामों से बचा जा सकता है। वास्तु के अनुसार ही कमरे की बनावट, उनमें सामानों की साज-सज्जा करते हैं। इससे घर की खूबसूरती बढ़ने के साथ-साथ सकारात्मक ऊर्जा का भी प्रवाह होता है।

 

– घर के प्रवेश द्वार पर स्वस्तिक अथवा ‘ॐ’ की आकृति लगाने से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

– जिस भूखंड या मकान पर मंदिर की पीठ पड़ती है, वहां रहने वाले दिन-ब-दिन आर्थिक व शारीरिक परेशानियों में घिरते रहते हैं।

– समृद्धि की प्राप्ति के लिए नार्थ-ईस्ट दिशा में पानी का कलश अवश्य रखना चाहिए।

– घर में ऊर्जात्मक वातावरण बनाने में सूर्य की रोशनी का विशेष महत्व होता है। इसलिए घर की आंतरिक साज-सज्जा ऐसी होनी चाहिए कि सूर्य की रोशनी घर में पर्याप्त रूप में प्रवेश करे।

– घर में कलह अथवा अशांति का वातावरण हो तो ड्राइंग रूम में फूलों का गुलदस्ता रखना श्रेष्ठ होता है।

– अशुद्ध वस्त्रों को घर के प्रवेश द्वार के मध्य में नहीं रखना चाहिए।

– वास्तु के अनुसार रसोईघर में देवस्थान नहीं होना चाहिए।

– गृहस्थ के बेडरूम में भगवान के चित्र अथवा धार्मिक महत्व की वस्तुएं नहीं लगी होना चाहिए।

– घर में देवस्थान की दीवार से शौचालय की दीवार का संपर्क नहीं होना चाहिए।

– किचन दक्षिण-पूर्व में, मास्टर बैडरूम दक्षिण-पश्चिम में, बच्चों का बैडरूम उत्तर-पश्चिम में और शौचालय आदि दक्षिण में हों।

– पानी की निकासी उत्तर में हो, ईशान (उत्तर-पूर्व) खुला हो, दक्षिण-पश्चिम दिशा में भारी सामान हो।

– पूजा के लिए ईशान कोण हो या भगवान का मुख ईशान में हो।

– उत्तर या पूर्व में तुलसी का पौधा लगाएं।
– पूर्वजों के फोटो पूजाघर में न रखें, दक्षिण की दीवार पर लगाएं।

– इष्टदेव का ध्यान और पूजन अवश्य करें।

– भोजन के बाद जूठी थाली लेकर अधिक देर तक न बैठें। न ही जूठे बर्तन देर तक सिंक में रखें।

– अपनी आय का एक हिस्सा इष्टदेव के नाम पर अलग रखें। घर में हमेशा समृद्धि बनी रहेगी।

– कक्ष की दीवारों या पर्दों का रंग भी सफेद, हल्का पीला, हल्का क्रीम, हल्का आसमानी रखें। हल्का नारंगी, केसरिया या भगवा रंग भी अच्छा लगता है। इन रंगों का इस्तेमाल करने से पूजा घर का वातावरण शुभ व कल्याणप्रद होता है।

– माता लक्ष्मी को बिल्ब पत्र एवं कमल पुष्प अतिप्रिय हैं। इस पुष्प से आप अपने पूजा घर को सजा सकते हैं। यदि नीचे दिए जा रहे उपाय करें और वास्तुदोष का निवारण स्वयं करें

– घर में अखंड रूप से 9 बार श्री रामचरितमानस का पाठ करने से वास्तुदोष का निवारण होता है। 1 घर में 9 दिन तक अखंड कीर्तन करने से वास्तुजनित दोषों का निवारण होता है।

– रसोई घर गलत स्थान पर हो तो अग्निकोण में एक बल्ब लगा दें और सुबह-शाम अनिवार्य रूप से जलाये। ६ द्धार दोष और वेध दोष दूर करने के लिए शंख, सीप, समुद्र झाग, कौड़ी लाल कपड़े में या मोली में बांधकर दरवाजे पर लटकायें।

– बीम के दोष को शांत करने के लिए बीम को सीलिंग टायल्स से ढंक दें। बीम के दोनों ओर बांस की बांसुरी लगायें।

– घर के दरवाजे पर घोड़े की नाल (लोहे की) लगायें। यह अपने आप गिरी होनी चाहिए।

– अगर आपका घर चारों ओर बड़े मकानों से घिरा हो तो उनके बीच बांस का लम्बा फ्लेग लगायें या कोई बहुत ऊंचा बढ़ने वाला पेड़ लगायें।

– अपने घर के मन्दिर में घी का एक दीपक नियमित जलाएं तथा शंख की ध्वनि तीन बार सुबह और शाम के समय करने से नकारात्मक ऊर्जा घर से बाहर निकलती है।

– घर में सफाई हेतु रखी झाडू को रास्ते के पास नहीं रखें। यदि झाडू के बार-बार पैर का स्पर्थ होता है, तो यह धननाश का कारण होता है। झाडू के ऊपर कोई वजनदार वास्तु भी नहीं रखें।

– अपने घर में दीवारों पर सुन्दर, हरियाली से युक्त और मन को प्रसन्न करने वाले चित्र लगाएं। इससे घर के मुखिया को होने वाली मानसिक परेशानियों से मुक्ति मिलती है।

– वास्तुदोष के कारण यदि घर में किसी सदस्य को रात में नींद नहीं आती या स्वभाव चिडचिडा रहता हो, तो उसे दक्षिण दिशा की तरफ सिर करके शयन कराएं। इससे उसके स्वभाव में बदलाव होगा और अनिद्रा की स्थिति में भी सुधार होगा।
– अपने घर के मन्दिर में देवी-देवताओं पर चढ़ाए गए पुष्प-हार दूसरे दिन हटा देने चाहिए और भगवान को नए पुष्प-हार अर्पित करने चाहिए।

– घर के उत्तर-पूर्व में कभी भी कचरा इकट्ठा न होने दें और न ही इधर भारी मशीनरी रखें। 23 अपने वंश की उन्नति के लिये घर के मुख्य द्धार पर अशोक के वृक्ष दोनों तरफ लगाएं।

– यदि आपके घर का मुख्य द्धार दक्षिणमुखी है, तो यह भी मुखिया के के लिये हानिकारक होता है. इसके लिये मुख्य द्धार पर श्वेतार्क गणपति की स्थापना करनी चाहिए।

– अपने घर के पूजा घर में देवताओं के चित्र भूलकर भी आमने-सामने नहीं रखने चाहिए इससे बड़ा दोष उत्पन्न होता है।

– यदि आपके रसोई घर में रेफ्रिजरेटर नैऋत्य कोण में रखा है, तो इसे वहां से हटाकर उत्तर या पश्चिम में रखें।

– दीपावली अथवा अन्य किसी शुभ मुहूर्त में अपने घर में पूजास्थल में वास्तुदोष नाशक कवच की स्थापना करें और नित्य इसकी पूजा करें। इस कवच को दोषयुक्त स्थान पर भी स्थापित करके आप वास्तुदोषों से सरलता से मुक्ति पा सकते हैं। 32 अपने घर में ईशान कोण अथवा ब्रह्मस्थल में स्फटिक श्रीयंत्र की शुभ मुहूर्त में स्थापना करें। यह यन्त्र लक्ष्मीप्रदायक भी होता ही है, साथ ही साथ घर में स्थित वास्तुदोषों का भी निवारण करता है।

– प्रातःकाल के समय एक कंडे/ उपले पर थोड़ी अग्नि जलाकर उस पर थोड़ी गुग्गल रखें और ‘ॐ नारायणाय नम:’ मंत्र का उच्चारण करते हुए तीन बार घी की कुछ बूंदें डालें। अब गुग्गल से जो धुंआ उत्पन्न हो, उसे अपने घर के प्रत्येक कमरे में जाने दें। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा ख़त्म होगी और वास्तुदोषों का नाश होगा।

– घर में किसी भी कमरे में सूखे हुए पुष्प ना रखें। यदि छोटे गुलदस्ते में रखे हुए फूल सूख जाएं, तो नए पुष्प लगा दें और सूखे पुष्पों को निकालकर बाहर फेंक दें।

– सुबह के समय थोड़ी देर तक निरंतर बजने वाली गायत्री मंत्र की धुन चलने दें। इसके अतिरिक्त कोई अन्य धुन भी आप बजा सकते हैं।

– सायंकाल के समय घर के सदस्य सामूहिक आरती करें। इससे भी वास्तुदोष दूर होते हैं।

– अगर आपके घर के पास कोई नाला या कोई नदी इस प्रकार बहती हो कि उसके बहाव की दिशा उत्तर-पूर्व को छोड़कर कोई और दिशा में है, या उसका घुमाव घडी कि विपरीत दिशा में है, तो यह वास्तु दोष है। इसका निवारण यह है कि घर के उत्तर-पूर्व कोने में पश्चिम की ओर मुख किए हुए, नृत्य करते हुए गणेश की मूर्ति रखें।

– यदि घर में जल निकालने का स्थान / बोरिंग गलत दिशा में हो तो भवन में दक्षिण-पश्चिम की ओर मुख किए हुए पंचमुखी हनुमानजी की तस्वीर लगाएं।

– अगर टॉयलेट घर के पूर्वी कोने में है तो टॉयलेट शीट इस प्रकार लगवाएं कि उस पर उत्तर की ओर मुख करके बैठ सकें या पश्चिम की ओर। इस प्रकार घर की नकारात्मक ऊर्जा की जगह सकारात्मक ऊर्जा ले लेगी और सारे वास्तु दोष भी दूर हो जाएंगे।

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