Analysis : इन कारणों से मायावती ने राज्यसभा से दिया इस्तीफा

नई दिल्ली. बसपा सुप्रीमो ने राज्यसभा में आक्रामक रुख अपनाते हुए राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया। सदन में बोलने न देने से नाराज मायावती ने यह कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि जब मैं सदन में अपनी बात ही नहीं रख सकती तो यहां होने का क्‍या लाभ? उन्‍होंने अपना इस्‍तीफा राज्‍यसभा के सभापति हामिद अंसारी को सौंप दिया।

बसपा सुप्रीमो का आरोप है कि भाजपा शासित राज्यों में दलितों पर अत्याचार हो रहा है। सहारनपुर हिंसा मामला इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने मायावती के इस फैसले को हताशा और अशांति फैलाने वाला प्रयास करार दिया है।

 

BSP Supremo Mayawati resigns from Rajya Sabha

BSP Supremo Mayawati resigns from Rajya Sabha

मायावती के राज्यसभा से इस्तीफे के बाद उत्तर प्रदेश में सियासी गर्मी बढ़ गई है। राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हैं कि मायावती के राज्यसभा से इस्तीफे का फैसला अचानक नहीं लिया गया, बल्कि सोची-समझी योजना है। क्योंकि इससे पहले भी सदन में कई बार ऐसा हुआ है, जब मायावती के बयान पर सत्तारूढ़ दलों के नेताओं ने हंगामा किया हो।

क्या कहते हैं जानकार
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मायावती अब फिर अपने कोर दलित वोट बैंक की पूरे दम से लौटना चाहती हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में वह देख चुकी हैं कि उनके मुस्लिम प्रेम के चलते दलितों ने उनसे किस कदर किनारा कर लिया था। इतना ही नहीं यह दलित वोट थोक भाव में भाजपा को मिले, जिसका रिजल्ट सामने है। ऐसे में मायावती कतई नहीं चाहेंगी कि 2019 के लोकसभा चुनाव में दलित वोट फिर उनसे छिटके। इसलिए वह खुद को नए सिरे से दलित हितैषी नेता के तौर पर पेश कर रही हैं।

अप्रैल में खत्म हो रही थी मायावती की सदस्यता
मायावती के राज्यसभा से इस्तीफे का एक कारण यह भी हो सकता है कि अप्रैल 2018 में उनकी राज्यसभा से सदस्यता समाप्त हो रही है। यूपी विधानसभा में बसपा की इतनी हैसियत नहीं है कि वह अपने दम पर मायावती को राज्यसभा में भेज सके। बसपा के पास यूपी विधानसभा में महज 19 सदस्य हैं जो मायावती को राज्यसभा में भेजने के लिए काफी नहीं है। बता दें कि 2 अप्रैल 2018 में मायावती समेत यूपी के 10 नेताओं की राज्यसभा से सदस्यता समाप्त हो रही है।

राज्यसभा का पूरा घटनाक्रम
मंगलवार सुह जब राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई। मायावती ने सहारपुर हिंसा मामले का उदाहरण देते हुए भाजपा पर सांप्रदायिक एजेंडे का आरोप लगाया। मायावती ने सदन में कहा कि उत्तर प्रदेश सहित भाजपा शासित राज्यों में दलितों पर अत्याचार हो रहा है। मायावती लगातार इस मामले पर यूपी की उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को घेर रही थीं, मगर राज्यसभा के उपसभापति पीजे कुरियन ने उन्हें समय पूरा होने की दलील देते हुए बैठने का आग्रह किया। इस दौरान मायावती और समय की मांग करती रहीं। समय न मिलने से वह भड़क उठीं और सदन से इस्तीफे की धमकी देकर वाक आउट कर दिया।

सदन से बाहर आते ही मायावती ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जब उन्हें सदन में बोलने का ही अधिकार नहीं है तो सदस्यता का क्या मतलब है। कुछ ही देर बाद मायावती ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया।

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