दुनिया में सबसे तेजी से तरक्की करने वाला देश बना भारत

नई दिल्ली। विश्व बैंक के अनुमानों से दो साल पहले ही भारत ने चीन को पछाड़ दिया है। सोमवार को जारी विकास दर के आंकड़ों में अक्टूबर-दिसंबर यानी तीसरी तिमाही में हमारी जीडीपी ग्रोथ रेट 7.5% रही। जबकि इस तिमाही में चीन की ग्रोथ रेट 7.3% दर्ज की गई। साथ ही इस पूरे वित्त वर्ष के लिए विकास दर 7.4% रहने की उम्मीद जताई गई है।india

विशेषज्ञों ने उठाए सवाल
न निवेश बढ़ा, न मांग फिर ग्रोथ कैसे?
कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद न तो नया निवेश बढ़ रहा और न ही मांग। फिर ये ग्रोथ कैसे हो सकती है। – एसोचैम, उद्योग संघ। वहीं, आरबीआई के गर्वनर रघुराम राजन ने कहा, “हमें नए आंकड़ों को समझने की जरूरत है। पुराने आधार पर इस साल ग्रोथ रेट 5.5% रह सकती है।”

ज्यादातर सेक्टर 7% के ऊपर (आंकड़े सीएसओ के मुताबिक)
वित्तीय सेवाओं, रियल्टी, ट्रेड, ट्रांसपोर्ट, बिजली, गैस समेत कई सेक्टरों में विकास दर 7% से ज्यादा रही है।
खेती की ग्रोथ रेट सबसे कम 1.1%, खनन की 2.3%, कंस्ट्रक्शन की 4.5%और मैन्युफैक्चरिंग की 6.8% रही।

इस साल 7.4 फीसदी रहेगी अर्थव्यवस्था की ग्रोथ रेट
मौजूदा वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था के 7.4 फीसदी की दर से आगे बढ़ने की उम्मीद है। यह अनुमान नए बेस ईयर के आधार पर है। इसी आधार पर साल 2013-14 में विकास दर 6.9 फीसदी थी। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) के मुताबिक सितंबर-दिसंबर यानी तीसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 7.5 फीसदी रही। दूसरी तिमाही में यह 8.2 फीसदी थी। पहली ति‍माही में जीडीपी ग्रोथ का संशोधि‍त आंकड़ा 6.5 फीसदी था।

नए बेस ईयर के आधार पर आंकड़े पहली बार 30 जनवरी को जारी हुए थे। उसमें मौजूदा साल में जीडीपी का आकार 106.57 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान लगाया गया है। पिछले साल यह 99.21 लाख करोड़ रुपए था। नया बेस ईयर 2011-12 है। पहले यह 2004-05 था।

सीएसओ के मुताबिक तीसरी तिमाही में वित्तीय सेवाओं, रियल्टी, ट्रेड, ट्रांसपोर्ट, बिजली, गैस समेत कई सेक्टरों में विकास दर सात फीसदी से ज्यादा रही है। खेती की ग्रोथ रेट 1.1 फीसदी, खनन की 2.3 फीसदी, कंस्ट्रक्शन की 4.5 फीसदी और मैन्युफैक्चरिंग की 6.8 फीसदी रही।

प्रति व्यक्ति आय
प्रति व्यक्ति आय इस साल 74,193 रुपए रहने का अनुमान है। यह पिछले साल के 69,959 रुपए से 6.1 फीसदी ज्यादा है।

ये हुए दो बदलाव
1. बेस ईयर : यह हर पांच साल में बदलता है। इससे पहले 2010 में बदला था। इसे इसलिए बदला जाता है, ताकि आंकड़े मौजूदा वास्तविक मूल्य के करीब हों। चीन में भी हर पांच साल में बदला जाता है। मौजूदा बेस ईयर 2005 का है।
2. फैक्टर कॉस्ट के बदले मार्केट प्राइस : पहले जीडीपी फैक्टर कॉस्ट के आधार पर आंकी जाती थी। अब मार्केट प्राइस के आधार पर आंकी जा रही है। किसी वस्तु को बनाने में जो लागत आती है (कंपनी के मार्जिन समेत) वह फैक्टर कॉस्ट होती है। जबकि टैक्स आदि जोड़ने के बाद की कीमत मार्केट प्राइस होती है।

 

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