भारत को मिला पहला चाइनामैन गेंदबाज, कुलदीप के चौके से सहमे कंगारू

Kuldeep debut match

Kuldeep debut match

खेल डेस्क. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आखिरी और निर्णायक टेस्ट मैच में डेब्यू करने वाले कानपुर के 22 वर्षीय कुलदीप यादव ने इतिहास रच दिया। वह भारत की तरफ से खेलने वाले 288वें खिलाड़ी बन गए। भारत के पूर्व क्रिकेटर एल. शिवारामाकृष्णन ने कुलदीप यादव को टीम इंडिया की कैप थमाई और उन्हें डेब्यू मैच के लिए उन्हें शुभकामनाएं भी दीं।

टेस्ट कैप पहनते ही कानपुर के कुलदीप यादव के नाम एक ऐसा रिकॉर्ड जुड़ गया, जो अब कोई नहीं तोड़ पाएगा। कुलदीप भारत की तरफ से टेस्ट खेलने वाले पहले चाइनामैन गेंदबाज बन गए हैं। इससे पहले भारत की तरफ से अभी तक कोई भी चाइनामैन गेंदबाज टेस्ट मैच नहीं खेला था।

धर्मशाला में हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के ग्राउंड पर चोटिल कोहली की जगह कानपुर के कुलदीप यादव को अंतिम एकादश में शामिल किया गया। उन्होंने अपने चयन को सही साबित करते हुए डेब्यू मैच में ही चार विकेट झटके। कुलदीप के प्रदर्शन का ही कमाल था कि एक समय मजबूत स्कोर की तरफ बढ़ती दिख रही ऑस्ट्रेलिया टीम 300 रनों पर ही बुक हो गई।

यह भी पढ़ें : धर्मशाला टेस्ट से पहले विराट कोहली का बड़ा बयान

वार्नर को बनाया पहला शिकार

कुलदीप यादव ने अपने चौथे ओवर में ही ऑस्ट्रेलियाई सलामी बल्लेबाज डेविड वार्नर (56) को पहला शिकार बनाया। जैसे उनकी गेंद पर डेविड वार्नर ने कप्तान अजिंक्य रहाणे को कैच थमाया चाइनामैन गेंदबाज की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। साथी खिलाड़ियों ने उन्हें बधाई दी। ओवर खत्म होते ही विराट कोहली ने भी उनकी पीठ थपथपाते हुए बधाई दी।

सचिन भी रह गए थे भौचक

कानपुर के इस युवा क्रिकेटर का नाम तब सुर्खियों में आ गया था, जब उन्होंने आईपीएल के दौरान प्रैक्टिस मैच में कुलदीप यादव ने अपनी बलखाती गेंद से मुंबई इंडियंस के कप्तान सचिन तेंदुलकर को छका दिया था। कुलदीप यादव ने सचिन के सामने ऐसी गेंद फेंकी जो पिच तो ऑफ स्टंप के बाहर हुई, लेकिन तेजी से अंदर आ गई।

क्या होता है चाइनामैन बॉलर
चाइनामैन गेंदबाजी ऐसी कला है, जिसमें कम खिलाड़ी ही माहिर होते हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है भारतीय टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में कुलदीप यादव पहले चाइनामैन गेंदबाज हैं। जब कोई बाएं हाथ का स्पिनर गेंद को अंगुलियों की बजाय कलाई से स्पिन कराता है, तो उसे ‘चाइनामैन बॉलर’ कहते हैं। उसकी गेंद टप्पा खाने के बाद तेजी से अंदर आ जाती है।

यह भी पढ़ें : धर्मशाला टेस्ट के पहले दिन ऑस्ट्रेलिया 300 पर ढेर

कोच बोले, बहुत दिन करेगा टीम इंडिया की सेवा
कुलदीप यादव के कानपुर के पहले ऐसे क्रिकेटर बन गए हैं, जिन्हें टीम इंडिया की सफेद जर्सी नसीब हुई है। कुलदीप के कोच कपिल यादव यादव ने कहा, वह बहुत मेहनती लड़का था, जिसका ईनाम भी उसे मिला। उन्होंने कहा, कुंबले के स्पिन गेंदबाजी का गुर सीखने के बाद कुलदीप और मारक हो गया है। यह बहुत दिन तक भारतीय टीम की सेवा करेगा।

पिता का ईंट का है कारोबार
कुलदीप के पिता रामसिंह यादव ईंट-भट्टा के कारोबारी है। उनका घर लाल बंगला में है। कुलदीप के परिवार में मां-बाप के अलावा दो बहनें हैं। बेटे के प्लेइंग इलेवन में शामिल होने की खबर मिलते ही सभी बेटे के डेब्यू को यादगार बनाने के लिए धर्मशाल निकल गए। कुलदीप के दोस्तों ने भी जमकर जश्न मनाया।

कुलदीप का क्रिकेट करियर
प्रथम श्रेणी क्रिकेट
गेंदबाजी : 22 मैचों में 81 विकेट, बेस्ट- 6/79
बल्लेबाजी : 22 मैचों में 723 रन, बेस्ट- 117 रन

लिस्ट ए
गेंदबाजी : 10 मैचों में 14 विकेट लिए, बेस्ट- 5/60
बल्लेबाजी : 10 मैचों में 49 रन, बेस्ट- 25 रन

टी20
गेंदबाजी : 27 मैचों में 37 विकेट, बेस्ट- 5/17
बल्लेबाजी : 27 मैचों में 24 रन, बेस्ट- 17 रन

Pin It