राष्ट्रपति के कर्तव्य, अधिकार और शक्तियां

नई दिल्ली. कानपुर (परौंख) उत्तर प्रदेश के निवासी व बिहार के राज्यपाल Ramnath Kovind देश के 14वें राष्ट्रपति बन गए हैं। NDA उम्मीदवार रामनाथ कोविंद ने विपक्ष की राष्ट्रपति उम्मीदवार दलित नेता मीरा कुमार को बड़े अंतर से हरा दिया। अब उन्हें राष्ट्रपति पद और गोपनीयता की शपथ लेनी है। राष्ट्रपति देश का प्रथम नागरिक होता है। तो आइए जानते हैं कि हमारे राष्ट्रपति के अधिकार और कर्तव्य क्या होते हैं।

 

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भारत के राष्ट्रपति के कर्तव्य, अधिकार और शक्तियां

– राष्ट्रपति देश का संवैधानिक मुखिया होता है, जिसे कई शक्तियां और अधिकार मिले हैं।
– संविधान के मुताबिक संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित है और वह अपनी इस शक्ति का इस्तेमाल केंद्रीय मंत्रिमण्डल के जरिए करता है।
– देश का शासन चलान के लिए राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद का गठन करता है, जिसका अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है।
– राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर मंत्रिपरिषद के किसी सदस्य को बर्ख़ास्त कर सकता है।
– किसी दल का स्पष्ट बहुमत न होने की दशा में राष्ट्रपति अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुए, ऐसे नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त करता है, जिसके बारे में उसे यकीन हो कि वह बहुमत सिद्ध कर सकता है।
– किसी विधेयक को में बदलने के लिए आखिरी मुहर राष्ट्रपति की ही लगती है।
– धन विधेयक, राज्य का निर्माण, नाम या सीमा बदलने संबंधी विधेयक, भूमि अधिग्रहण से संबंधित विधेयक बिना राष्ट्रपति की सहमति के संसद में पेश नहीं किए जा सकते।
– राष्ट्रपति के पास किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए किसी व्यक्ति के दंड को क्षमा, निलंबन, लघुकरण और परिहार की शक्ति है। मृत्युदंड पाए अपराधी की सजा पर भी फैसला लेने का उसको अधिकार है।
– साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले 12 व्यक्तियों को राष्ट्रपति, राज्यसभा के लिए नामांकित कर सकता है।
– राष्ट्रपति किसी सदन का सत्रावसान कर सकता है।
– युद्ध या बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह की स्थिति में आपातकाल की घोषणा कर सकता है।
– राष्ट्रपति द्वारा किसी राज्य के सांविधानिक तंत्र के विफल होने की दशा में राज्यपाल की रिपोर्ट के आधार पर वहां राष्ट्रपति शासन लगा सकता है।
– भारत या उसके राज्य क्षेत्र के किसी भाग में वित्तीय संकट की दशा में वित्तीय आपात की घोषणा का अधिकार राष्ट्रपति को है।

यह शपथ लेते हैं राष्ट्रपति
प्रत्येक राष्ट्रपति अपना पद ग्रहण करने से पहले देश के मुख्य न्यायमूर्ति या उनकी अनुपस्थिति में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश के समक्ष शपथ लेगा और उस पर हस्ताक्षर करेगा-
‘मैं अमुक…….. ईश्वर की शपथ लेता हूं कि मैं श्रद्धापूर्वक राष्ट्रपति पद के कर्तव्यों का निर्वहन सत्यनिष्ठा से करूंगा तथा अपनी पूरी योग्यता से संविधान और विधि का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करूंगा और मैं भारत की जनता की सेवा और कल्याण में निरत रहूंगा।’

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