पर्यावरण के क्षेत्र में भी विश्वगुरु बने भारत

परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष एवं ग्लोबल इण्टर फेथ वाश एलायंस के सह-संस्थापक स्वामी चिदानन्द सरस्वती , जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महसचिव साध्वी भगवती सरस्वती एवं पर्यटन मंत्री भारत सरकार के जे अल्फोंस की मुलाकात दिल्ली में हुई। स्वामी एवं के जे अल्फोंस के मध्य भारत को हरित एंव शुद्ध प्राणवायु आॅक्सीजन पर्यटन के रूप में विकसित करने के विषयों पर चर्चा हुई। स्वामी ने कहा कि उत्तराखण्ड प्राणवायु आॅक्सीजन के विषय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है तथा कुम्भ मेलों को हरित एवं स्वच्छ बनाने को लेकर भी विचार विमर्श किया गया। स्वामी जी ने कहा कि उत्तराखण्ड के पास गंगा रूपी अमुल्य धरोहर के साथ योग, आयुर्वेद और स्वच्छ हवा का खजाना हिमालय है इसके लिये कुछ बेहतर योजना बनायी जाये तो हम दुनिया को आध्यात्म और आॅक्सीजन का अप्रतिम पैकेज प्रदान कर सकते है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि धरती पर होने वाला सबसे बड़ा, भारतीय संस्कृति, आध्यात्म एवं संस्कारों से परिपूर्ण शान्तिपूर्ण रूप से सम्पन्न होने वाला धार्मिक आयोजन ’महाकुम्भ’ को युनेस्कों की सूची में स्थान मिला यह भारत के लिये गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि महाकुम्भ समरसता, सहिष्णुता और वैश्विक बन्धुत्व का अमूर्त उदाहरण है। स्वामी ने कहा ’भारतीय संस्कृति व आध्यात्म ने विश्व में वसुधैव कुटुम्बकम की संस्कृति, योग और शान्ति का संदेश दिया है अब समय आ गया है कि हम अपनी हिमालय रूपी धरोहर को ’प्राणवायु आॅक्सीजन दाता’ केन्द्र के रूप में विकसित करे और भारतीय पर्यटन को योग पर्यटन; आयुर्वेद पर्यटन, प्रदूषण मुक्त पर्यटन और हरित और जैविक पर्यटन के रूप में विकसित करें ताकि हम विश्व से आने वाले पर्यटकों को स्वच्छ, प्रदूषण मुक्त एवं शुद्ध प्राणवायु दे सकें। पर्यटक यहां आकर शु़द्ध प्राणवायु के साथ प्राणायाम कर सके। उन्होने कहा हम सब मिलकर ऐसा प्रयास करे कि भारत को दुनिया के लोग, बढ़ते फाॅग, स्माॅग और वायु प्रदूषण के रूप में नहीं बल्कि स्वच्छ, हरित एवं शुद्ध प्राणवायु दाता के रूप में स्वीकार करें।

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