समाजवाद, समाजवादी पार्टी और किसान

resizedimageलखनऊ।। समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने कहा है कि संघीय व्यवस्था में केन्द्र राज्य के बीच सहयेाग की अवधारणा को केन्द्र की कांग्रेस सरकार नष्ट करने पर तुल गई है। उत्तर प्रदेश के प्रति कांग्रेस का रवैया पूर्णतः उपेक्षा और अवहेलना का दिखाई दे रहा है। गन्ना किसानों की समस्या के समाधान में केन्द्र सरकार का असहयोग किसान विरोधी है। उत्तर प्रदेश में चीनी मिल मालिकों ने असंवेदनशील रूख अपना रखा है। घोषित गन्ना मूल्य पर पेराई न करने की जिद उचित नहीं है। किसान परेसान हैं। सरकार ने कई बार वार्ताएं कर समस्या समाधान की कोशिश की है, मिल मालिकों को जितनी रियायतें दी जा सकती थीं दी गई हैं। समाजवादी पार्टी सरकार ने शुगर इंडस्ट्री को एंट्री टैक्स में छूट देने की घोषणा की है। इससे मिलों को 219 करोड़ रूपए का फायदा होगा। इसके पूर्व गन्ना क्रय कर में दो रूपए कुंतल की छूट देकर 160 करोड़ की सरकार राहत दे चुकी है। उन्हें अब किसानों के प्रति सद्भावना में पेराई शुरू कर देनी चाहिए।

 बजाज समूह के शेखर बजाज का यह कहना कि जहां फायदा होगा वहीं निवेश करेंगे जनविरोधी बयान है। उनके बयान से सियासत की बू आती है। उन्हें सरकार से तमाम शिकायतें हैं। अच्छा होता कि वे चीनी मिलों में बरती जानेवाली अनियमितताओं और किसानों के साथ  होनेवाले व्यवहार पर भी कुछ बोलते। यह सर्वविदित तथ्य है कि कांग्रेस राज में डीजल, खाद, बीज और कृषि उपकरणों के दामों में हुई बढ़ोत्तरी से फसलों के उत्पादन की लागत बढ़ गई है। फिर भी इस पेराई सत्र में गन्ने के दाम राज्य सरकार ने नहीं बढ़ाए हैं। इसके बावजूद चीनी मिल मालिकों का पेराई न शुरू करना किसी भी तरह न्यायसंगत नहीं माना जा सकता है। समाजवादी पार्टी गांव, गरीब और किसानों के प्रति समर्पित है। राज्य के 40 लाख गन्ना किसानों के हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती है। राज्य सरकार किसी के प्रति भी दमनात्मक कार्यवाही करने के पक्ष में नहीं रही है। लेकिन किसी को लूट करने और मनमानी करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। किसानों के साथ नाइंसाफी बर्दाश्त नहीं की जा सकती हैं। संविधान के तहत जो भी उचित कदम उठाए जाने हैं, सरकार उससे हिचकेगी नहीं। समाजवादी पार्टी और समाजवाद यहां असहाय दिख रहा है।

उत्तर प्रदेश में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 4 दिसम्बर और अन्य क्षेत्रों में 7 दिसम्बर तक गन्ना पेराई करने का चीनी मिलों को निर्देश दिया गया है। ऐसा नहीं होने पर मजबूरन कड़ी कार्यवाही करनी होगी। प्रदेश में 123 चीनी मिलें कार्यरत है और किसान उन्हें 22500 करोड़ रूपए की गन्ना आपूर्ति करते है। समाजवादी पार्टी किसानों के हितों की अनदेखी नहीं होने देगी।

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